Trayavarta Yoni and Vayobhedena Stri Sangnya

 Trayavarta Yoni (त्रयवर्त योनि ) :

शङ्ख्नाभ्यकृति तोनिस्त्रयावर्त सा प्रकीर्तिता |
तस्यास्त्रुतियो त्वावर्ते गर्भशय्या प्रतिष्ठिता || (सु. शा.५/55)

योनि आकृति (shape of yoni ) - शङ्ख नाभि सदृश
which has three avarta , In third आवर्त , गर्भाशाय is present.

गर्भाशय आकृति ( shape of uterus) - रोहितमत्स्य मुखवत (सुश्रुत)

Explaination :

In samhitas yoni word -
Whole stri jananga ( स्त्री जनाङ्ग)  or Reproductive system or vagina or uterus. 
If yoni word is used for whole reproductive system i.e स्त्री जनाङ्ग , Then it will be vey easy to understand trayavarta yoni.

Acharya Sushruta - Shape of yoni is like that of shankha nabhi                                            (शङ्ख नाभि सदृश)
                                शङ्ख - Narrow below, broad above.

Yoni is present in the form of 3 Avarta (आवर्त) or concentric circles known as Trayavarta yoni.
Shape of the uterus and vagina are narrow below and broad above
Structure of uterus is like pear shaped (Upper broad and Lower narrow)
Cervix is low and cylindrical part of uterus and vagina is like tube.

In anatomical position these 3 structures are placed in AV-AF (version-flexion) Position that Acharya Sushruta  called as Avarta (आवर्त).

3 Avarta of yoni should be :
1st आवर्त - Vagina - from vestibule to ext. OS
2nd आवर्त - Cervix - from ext OS to int OS
3rd आवर्त - Uterus - from int. OS to fundus of uterus.

3rd Avarta (आवर्त) is where garbhashaya (गर्भाशय) is situated.
Uterine activity(Uterus) - Site of implantation of fetus.

Vyobheda Stri Sangnya (वयोभेदेन स्त्री संज्ञय) :

   आयु अवस्था

         उपवर्ग

  आयु सिमा

         शारीरिक – परिवर्तन

          दोष – स्थिति

बल्स्यावस्था   

बाला

कुमारी (रजोदर्शन पुर्ववस्थ) (मुग्दावस्थ)

रजोमति (रजोदर्षनावस्थ)(रजोस्वला)

10 वर्ष

10-12 वर्ष

 

12 –16 वर्ष

सर्वांगिण शारीरिक वृद्धि

स्तन and योनि वृद्धि

 

रजोदर्शन प्रारम्भ and पूर्णरूपेण उपस्थित, स्त्री गर्भधान योग्य

कफोल्वण पित्तवायु हिन

कफोल्वण पित्त मध्य वायु हिन

 

कफपित्तोल्वण and वायु हिन

मध्यमवस्था

युवति (वृद्धि कि अवस्था) (योवनवस्था) (तरुणी)

परोढवस्था (अधिरूढः) (प्रगल्भा)

 

वृद्धावस्था

16- 40 वर्ष

 

40- 50 वर्ष

 

50 वर्ष बाद

उच्चतम प्रजनन शक्ति सर्वगिण वृद्धि and संपूर्णता

अल्प प्रजनन शक्ति , रजोनिवृत्ति लक्षण प्रारम्भ

 

रजोनिवृत्ति

पित्तोल्वण कफ मध्यं वायु हिन

 

पित्तोल्वण वायु मद्य and कफा हिन

वातोल्वण , पित्त मद्य कफा हिन

वृद्धावस्था

वृद्धावस्था

50-55 वर्ष बाद

सर्वगिण क्षय कि अवस्था

वातोल्वण , पित्त and कफा

 

Note : Rotate your screen to view table if used in mobile or tablet.

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